व्यावसायिक स्थलों या फैक्टरी वास्तु 1. भूखण्ड के नैर्त्रत्य कोण में धरातल सबसे अधिक ऊचा होना चाहिए उत्तर - पूर्व व ईशान में अपेक्षाकृत नीचा होना चाहिए | 2. सामान्य वास्तु सिद्धान्त के अनुरूप उत्तरी एवं पूर्वी भाग अधिक खाली रखे तथा दक्षिणी व पश्चिमी भाग में रिक्त स्थान कम रखें | 3. कारखाने का प्राशासनिक कार्यालय पूर्व या उत्तर दिशा में बानवाना चाहिए | 4. मुख्य द्वार पूर्वी आग्नेय या उत्तरी व्याव्य में भी न बनवाएं | 5. मुख्य द्वार नैर्त्रत्य में कदापि न बनवाये | 6. बड़े वाहनों के आवागमन के लिए दो स्थानों पर द्वारा बनवाने चाहिए | 7. कारखानों का प्रभुत्व प्रवेश द्वार पूर्व , उत्तर एवं ईशान दिशा में बनवाना चाहिए | 8. यदि प्रशासनिक कार्यालय को पूर्व अथवा उत्तर दिशा में बना पाना संभव न हो तो नैर्त्रत्य में भी बनवाया जा सकता है इसमें बैठने वाले ...