Posts

  8 अगस्त से 7 अक्टूबर के बीच जन्म लेने वाले मनुष्य की विशेषता   जब हम उस व्यक्ति को समझने का प्रयास करते हैं जिसका जन्म उस कालखंड में हुआ है जहाँ जल तत्त्व अपनी गहराई में सक्रिय होता है , विशेष रूप से 8 अगस्त से 7 अक्टूबर के मध्य , और उसके साथ उत्तर दिशा का प्रभाव तथा गोल चेहरे की संरचना जुड़ जाती है , तब हम केवल एक व्यक्ति को नहीं , बल्कि एक प्रवाहित चेतना को समझ रहे होते हैं। ऐसा व्यक्ति जीवन को सीधी रेखा में नहीं जीता , बल्कि तरंगों में जीता है। उसके भीतर जो कुछ भी घटित होता है , वह सतह पर दिखाई नहीं देता , बल्कि गहराई में चलता है—जहाँ शब्द समाप्त हो जाते हैं और अनुभूति प्रारम्भ होती है। उसका स्वभाव जल के समान होता है—शांत , लचीला और परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढाल लेने वाला। वह जीवन से टकराता नहीं , बल्कि उसे अपने भीतर समाहित कर लेता है। यही कारण है कि वह बाहर से सरल और स्थिर दिखाई देता है , किन्तु उसके भीतर एक गहरा संसार चलता रहता है। वह केवल सुनता नहीं , बल्कि महसूस करता है ; केवल देखता नहीं , बल्कि समझता है। उसके लिए जीवन तर्क का विषय नहीं , बल्कि अनुभव का प्रव...
Image
                                             DEFECTIVE NE CORNER IN VASTU जब ईशान कोण दूषित होता है , तो उसका प्रभाव केवल घर के एक कोने तक सीमित नहीं रहता … वह धीरे - धीरे पूरे जीवन में फैलने लगता है। यह वही स्थान है जहाँ से शिखी देवता की सूक्ष्म चेतना प्रवेश करती है , जहाँ से मन को दिशा मिलती है , जहाँ से जीवन में स्पष्टता आती है। पर जब इसी स्थान पर टॉयलेट बन जाता है , या वहाँ लाल और पीले रंग की भारी ऊर्जा भर दी जाती है , या वह स्थान गंदगी और बंदपन से भर जाता है , तब सबसे पहले शिखी की वह शांत ज्योति दबने लगती है। शुरुआत बहुत सूक्ष्म होती है … व्यक्ति को हल्का सा डर महसूस होने लगता है … बिना कारण चिंता होने लगती है … उसे समझ नहीं आता कि भीतर क्या बदल रहा है , पर UB और Kidney की ऊर्जा धीरे - धीरे कमजोर होने लगती है। यही कारण है कि anxiety, असुरक्ष...