रेमेडी आवश्यक नहीं है, यदि हो ईशान का सीमित विस्तार👇
मित्रों, भवन का ईशान सबसे पवित्र ज़ोन है क्योंकि ईशान कोण ही एक ऐसा बिंदु है जहां पर सूर्य की पहली किरण आकर स्पर्श करती है। और यही वह स्थान है जहां वास्तु पुरुष का शीर्ष एवं ईश्वर का वास माना गया है, इसी लिये इसको "ईशान" कहा गया है।
चूंकि यहां गुरू (बृहस्पति) का वास होता है। इसलिये यह आसानी से समझा जा सकता है कि, यदि भूखंड ईशान की तरफ बड़ा हुआ है अर्थात उस तरफ विस्तार हो रहा है तो बृहस्पति की चीजों में वृद्धि ही होगी। इसका सीधा सा मतलब है कि यदि इस ईशान विस्तारित भूखंड पर कोई मकान बना कर रहता है तो उस मकान में रहने वाले के ऐश्वर्य एवं वैभव में वृद्धि होगी।
लेकिन वृद्धि के और क्या कारण हो सकते हैं ?
दो स्थितियों में, ईशान का विस्तार हो सकता है।
यदि ईशान के साथ-साथ पूर्व की ओर की जमीन भी बढ़ी हुई है। हम जानते हैं कि इस दिशा का स्वामी ग्रह सूर्य एवं देवता इंद्र हैं। चूंकि यह सूर्य के उगने की दिशा है, इसलिये ऐसे भूखंड पर बने मकान में रहने वाले को अच्छा स्वास्थ्य, बुद्धि, धन, भाग्य एवं सुख समृद्धि की प्राप्ति होगी। मेरी राय में यदि इस भूखंड पर बने भवन निर्माण के साथ पूर्व दिशा का कुछ स्थान खुला छोड़ दिया जाये और इस स्थान को अपेक्षाकृत नीचा रखा जाये एवं साफ- सुथरा रखा जाये तो, पितृगणों का आशीर्वाद भी बना रहेगा और उनके जीवन में चहुं ओर से वृद्धि ही मिलेगी।
अब आते हैं दूसरे विचार पर। यहां भी केवल ईशान ही नहीं, बल्कि उत्तर की ओर की जमीन भी बढ़ी हो सकती है। चूंकि उत्तर दिशा के स्वामी ग्रह बुद्ध एवं देवता कुबेर हैं इसलिये यह दिशा सभी प्रकार से सुख देती है, इसलिये इस भूखंड पर बने मकान में धन और समृद्धि निरंतर बनी रहेगी। इसके अतिरिक्त ये लोग आध्यात्मिक एवं मानसिक रूप से भी संपन्न होंगे और ये लोग अच्छी वाणी बोलने वाले भी होंगे।
आज के विषय के अनुसार देखा जाय तो वास्तु शास्त्र के अनुसार, किसी भी भूखंड या भवन के चारों कोणों (उप दिशाओं) के घटने-बढ़ने का सीधा प्रभाव वहां रहने वालों के स्वास्थ्य, धन और मानसिक शांति पर पड़ता ही है। इसी लिए इनके प्रभावों ,के लाभ बढ़ाने व हानि घटाने के उपायों को क्रमबद्ध तरीके से सोचने समझने का प्रयास हमारा ग्रुप कर रहा है।
1. ईशान कोण (उत्तर-पूर्व)
देवता: बृहस्पति |
तत्व: जल |
प्रभाव: आध्यात्मिक, मानसिक एवं आर्थिक समृद्धि
बढ़ने पर लाभ:
1. घर में धन, समृद्धि और आय में निरंतर वृद्धि होती है।
2. सोचने-समझने की शक्ति और निर्णय लेने की क्षमता का विकास होता है।
घटने (कटा हुआ) या भारी होने पर हानि:
1. इस कोण के कटे होने पर घर में सुख-शांति का अभाव हो जाता है।
2. यदि यह कोण भारी (जैसे—टॉयलेट या भारी टंकी) हो, तो पेट व फेफड़ों और मस्तिष्क के रोग आदि हो सकते हैं।
3.ईशान के दोष हर तरह के प्रॉब्लम्स (जिनको हम कल्पना कर सकते हैं) ला सकते हैं
लाभ बढ़ाने एवं नुकसान कम करने के कुछ उपाय:
1. इसे खुला, हल्का और पूर्णतः साफ-सुथरा रखें।
2. यहां पानी का स्रोत (फव्वारा, एक्वेरियम) या जल से भरा पात्र रखें।
3. यहां मंदिर या पूजा स्थल बनाना सर्वोत्तम है। साथ ही भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित कर सकते हैं।
4. समतल दर्पण लगाकर आभासी रूप से कोण को बढ़ाएं।5. ईशान कोण का कटाव यदि सिर्फ भवन में हो और उसके आगे सिम ले आधिपत्य की भूमि(प्लाट) उपलब्ध हो तो मकान।की।दिवस्ते के8 दर्द में स्पेस सर्जरी (धातु स्ट्रिप+ क्रिस्टल पिरामिड लगा कर भवन को पूर्ण आयताकार बनाएं।
6.क्लियर क्वार्ट्ज (स्फटिक), या सेट्रीन क्रिस्टल का उपयोग।करे (एमेथिस्ट भी उपयोगी).
( 2). आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व)
देवता: अग्नि | तत्व: अग्नि |
प्रभाव: ऊर्जा, उत्पादन शक्ति, स्वास्थ्य
बढ़ने पर लाभ:
(थोड़ा बढ़ना बर्दाश्त योग्य है अधिक बढ़ने पर नुकसान)
1. खाद्य, होटल या केमिकल जैसे व्यवसायों में विशेष लाभ देता है。
2. इस बड़े कोण में जनरेटर, ट्रांसफार्मर रखने से कुछ हद तक उत्पादन और मुनाफा बढ़ता है।
घटने पर और ज्यादा बढ़ जाने पर हानि:
1. घर में आर्थिक संकट और मानसिक परेशानियां बढ़ती हैं।
2. गृहस्वामी के बाएं हाथ व घुटनों एवं पत्नी के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है।
* लाभ बढ़ाने एवं नुकसान कम करने के उपाय:*
1. इस कोण को उत्तर पश्चिम से भारी रखें और सुनिश्चित करें कि यह ईशान कोण से ऊंचा हो।
2. यहां रसोई बनाएं, लेकिन पानी की टंकी, कुआं या नल न रखें।
3. यहां पर लाल या नारंगी रंग का बल्ब, मनी प्लांट या लकड़ी की वस्तुएं रखें।
(3). नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम)
देवता: नैरृति / राहु |
तत्व: पृथ्वी |
प्रभाव: स्थिरता, शक्ति, परिवार
थोड़ा सा बढ़ने पर लाभ का अनुभव या भ्रम हो सकताहै अन्यथा हानि ही होती है:
यह सबसे शक्तिशाली कोण है; इसका थोड़ा बढ़ा होना स्थिरता, मजबूती और अधिकार को दर्शाता है, जो राजनीति या प्रशासन में सफलता देने का आभास देता है।
घटने या बढ़ने पर हानि:
1. परिवार के मुखिया की छवि कमजोर होती है और धन-संपत्ति की हानि होती है।
2. घर में स्थिरता का अभाव हो जाता है।
लाभ बढ़ाने एवं नुकसान कम करने के उपाय:
1. इस कोण को सबसे ऊंचा एवं भारी रखें, भूलकर भी इसे हल्का (खाली) न छोड़ें।
2. इस दिशा में यदि भवन ऊंचा न हो तो छत पर एंटेना या झंडा लगाकर आभासी रूप से ऊंचा करें।
3. आभासी रूप से कोण भारी करने हेतु लेड धातु के ठोस पिरामिड या इंगोट।रखें।
4. मास्टर बेडरूम इसी कोण में बनाएं।
4. दक्षिण या नैऋत्य दिशा से जुड़े दोष दूर
Unlock Success: 10 Simple Vastu Tips for Your Home Office Table of Contents Working from home has become the new norm for many. While it can be enjoyable, balancing work with household chores can sometimes be stressful. Here are Vastu tips for your home office, to help you transform your workspace into a productivity powerhouse. Crafting an effective home office is not just about setting up a desk and chair— it’s about creating a productive environment that fuels your success . Before we delve into Vastu tips, here are some general strategies to transform any dull space into a powerhouse of productivity. 1. Establish Your Workspace: Your home office should be a distinct area, separate from where you perform household chores. This separation helps maintain focus and reduces distractions. Ample lighting is essential for a vibrant workspace. Ensure your area is well-lit with natural or artificial light to boost energy levels and reduce eye strain. Now, let’s harness ...
Comments
Post a Comment